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मियावाकी वन: भारत में शहरी वनीकरण की क्रांति

मियावाकी वन: भारत में शहरी वनीकरण की क्रांति
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मियावाकी वन: भारत में शहरी वनीकरण की क्रांति

| विषय | मुख्य तथ्य | | ---------------------- | ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- | | मियावाकी वन तकनीक | शहरी वनीकरण (Urban Afforestation) की एक पद्धति, जिसके माध्यम से कम स्थान में घने एवं तीव्र गति से बढ़ने वाले देशी (Native) वनों का विकास किया जाता है। इसका उद्गम जापान में हुआ। | | आविष्कारक | जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी (Dr. Akira Miyawaki) द्वारा 1970 के दशक में विकसित। उन्हें ब्लू प्लैनेट पुरस्कार (Blue Planet Prize), 2006 से सम्मानित किया गया। | | प्रमुख विशेषताएँ | - घने एवं बहु-स्तरीय (Multi-Layered) देशी प्रजातियों का रोपण (प्रति वर्ग मीटर 3–5 पौधे)। | | | - चार स्तर: झाड़ी (Shrub), उप-वृक्ष (Sub-Tree), वृक्ष (Tree) एवं छत्रक/कैनोपी (Canopy)। | | | - 2–3 वर्षों के बाद न्यूनतम रखरखाव (Maintenance) की आवश्यकता। | | प्रमुख भारतीय शहर | बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई एवं अहमदाबाद, जहाँ इसे शहरी सतत विकास (Urban Sustainability) कार्यक्रमों में शामिल किया गया है। | | सबसे बड़ी परियोजना | स्मृतिवन भूकंप स्मारक (Smritivan Earthquake Memorial), गुजरात470 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ, जिसे विश्व का सबसे बड़ा मियावाकी वन माना जाता है। |

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